हो गई शब न कर उदास मुझे

खींच जल्दी से अपने पास मुझे

ऐ ख़ुशी जा कि तेरा अब क्या काम
आ गई है उदासी रास मुझे

मेरी तकलीफ़ कुछ तो कम होती
जो नज़र आती तुम उदास मुझे

ज़िम्मे-दारी ही पहने फिरता हूँ
कैसे देखोगे ख़ुश-लिबास मुझे

अपने ज़ेवर नज़र में रखते हैं लोग
वो भी रखता है आस-पास मुझे

आज भी भेजी ख़त में कड़वाहट
आज तो भेजते मिठास मुझे

— Dharmesh Solanki

More by Dharmesh Solanki

Other ghazal from the same pen

See all from Dharmesh Solanki →

Aanch Shayari

Shers of aanch.

All Aanch Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling