कभी सोचा ही न था इतना ख़सारा होगा
इश्क़ में ऐसा भी बद-हाल हमारा होगा
तुम ने दानिस्ता किया हो नज़र-अंदाज़ मगर
राह में आज तुम्हें उस ने पुकारा होगा
इक तुम्हारी बची थी आस मगर वो भी गई
सोचते रहते हैं अब कौन हमारा होगा
लब पे मुस्कान है और आँख भी नम है उस की
हो न हो मुझ सा ही वो दर्द का मारा होगा
ना-ख़ुदा मैं तिरी चालों से बड़ा वाक़िफ़ हूँ
लगता है बीच भँवर में ही उतारा होगा
— Dharmesh Solanki















