Meaning of

क़ाफ़िए

qaafiye • قافیہ

तुक; अंतिम ध्वनि

rhyme; end sound

قافیہ; آخری آواز

Arabic

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है — divya 'sabaa'
ग़ज़ल के क़ाफ़िए बदले, ग़ज़ल बदली ग़ज़ल के फिर मआ'नी भी नए रक्खे — Dileep Kumar
रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता — Avtar Singh Jasser
अकेला ही रहा हूँ मैं अकेले ग़लतियाँ ढोई वही हूँ शब्द मैं जिस का नहीं है क़ाफ़िया कोई — Vishakt ki Kalam se

क़ाफ़िए कविता में तुकबंदी योजना को संदर्भित करता है, एक महत्वपूर्ण तत्व जो पंक्तियों को एक साथ बांधता है। यह एक सामंजस्यपूर्ण संरचना प्रदान करता है, जिससे कवि ध्वनि और लय के साथ खेल सकते हैं, एक संगीतात्मकता पैदा करते हैं जो भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाती है।

कवि 'क़ाफ़िए' का उपयोग एकता और प्रवाह की भावना पैदा करने के लिए करते हैं। यह विचारों के बीच विरोधाभास या समानता को उजागर कर सकता है। तुकबंदी योजना अक्सर कविता की गति और मूड को निर्धारित करती है।

क़ाफ़िए ध्वनि की एक गाथा बुनता है, कविता की आत्मा को बांधता है।