
रहने लगे उदास तो लिखने लगे थे शे'र
सूखे हुए थे पेड़ सो कश्ती बना दिया
दिन भर लगा के उस को बनाया था इक मकाँ
साहिल की एक मौज़ ने मिट्टी बना दिया
— Dipendra Singh 'Raaz'
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