आलाम-ए-सफ़र याद न गुज़री जो बला याद

हम अहल-ए-वफ़ा को रही बस राह-ए-वफ़ा याद

अब तो नहीं आती कोई आवाज़ कहीं से
अब तो नहीं दिल को भी धड़कने की सदा याद

आईना-ए-अय्याम तो शफ़्फ़ाफ़ है लेकिन
इतना कि हमें अपना ही चेहरा न रहा याद

ऐ दश्त-ए-जुनूँ किस ने तुझे बाग़ बनाया
क्या तुझ को नहीं क़ैस का शिकवा-ओ-गिला याद

क्या जानिए मिज़गाँ पे 'सबा' है ये नमी क्यूँ
आँखों को नहीं कुछ भी छलकने के सिवा याद

— divya 'sabaa'

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