apna bhi hai qusoor ki khudsar ziyaada hain | अपना भी है क़ुसूर कि ख़ुद सेर ज़ियादा हैं

  - divya 'sabaa'

अपना भी है क़ुसूर कि ख़ुद सेर ज़ियादा हैं
कुछ ये कि इस दयार में पत्थर ज़ियादा हैं

बस एक वार और कि क़िस्सा तमाम हो
एहसान यूँँ भी आपके हम पर ज़ियादा हैं

बाहर की ये शबीह तो परछाई है मिरी
माकूस आइने मिरे अंदर ज़ियादा हैं

शिकरा बुलंदियों पे कहीं ताक में न हो
इस छत पे आज कल से कबूतर ज़ियादा हैं

दोबारा पढ़ रही हूँ तुम्हारे ख़ुतूत को
जिन
में ख़ुलूस कम हैं मुअत्तर ज़ियादा हैं

सर कट चुका है और ख़बर तक नहीं 'सबा'
बेशक तुम्हारी तेग़ में जौहर ज़ियादा हैं

  - divya 'sabaa'

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