na poochiye ki ye lahjaa kahaan ka hissa hai | न पूछिए कि ये लहजा कहाँ का हिस्सा है

  - divya 'sabaa'

न पूछिए कि ये लहजा कहाँ का हिस्सा है
कड़ी ज़ुबान मिरे जिस्म-ओ-जाँ का हिस्सा है

कभी ख़याल तुम्हारा कभी तुम्हारी बात
हमारा घर भी किसी कहकशाँ का हिस्सा है

लहू की बूँद हर इक लफ़्ज़ को अता दिल की
बचा जो कुछ मिरी तब'-ए-रवाँ का हिस्सा है

हमेशा दिल ने कहा है अदा-ए-सजदा पर
उठा ये सर कि फ़राज़-ए-सिनाँ का हिस्सा है

अगर हुज़ूर ने दीवान-ए-मीर देखा हो
हर एक शे'र मिरी दास्ताँ का हिस्सा है

ये हसरतें हैं मिरी वो रहे गुनाह मिरे
इधर ज़मीं का उधर आसमाँ का हिस्सा है

मिरा सुख़न तो 'सबा' सिर्फ़ दिल्लगी के लिए
मियाँ ग़ज़ल असद उल्लाह खाँ का हिस्सा है

  - divya 'sabaa'

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