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SHER
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है — Rahat Indori
SHER
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़' क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया — Firaq Gorakhpuri
SHER
नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान — Nida Fazli
NAZM
"पंद्रह अगस्त"
— Maftun Kotvi
"पंद्रह अगस्त" ख़ुशियों के गीत गाओ कि पंद्रह अगस्त है सब मिल के मुस्कुराओ कि पंद्रह अगस्त है हर सम्त क़हक़हे हैं चराग़ाँ है हर तरफ़ तुम ख़ुद भी जगमगाओ कि पंद्रह अगस्त है हर गोशा-ए-वतन को निखारो सँवार दो महकाओ लहलहाओ कि पंद्रह अगस्त है आज़ादी-ए-वतन पे हुए हैं कई निसार ख़ातिर में इन को लाओ कि पंद्रह अगस्त है रक्खो न सिर्फ़ ख़ंदा-ए-गुल हैं निगाह में काँटों को भी हँसाओ कि पंद्रह अगस्त है रूहें अमान-ओ-अम्न की प्यासी हैं आज भी प्यास इन की अब बुझाओ कि पंद्रह अगस्त है शम्अ' ख़ुलूस-ओ-उन्स की मद्धम है रौशनी लौ और कुछ बढ़ाओ कि पंद्रह अगस्त है ये अहद तुम करो कि फ़सादात फिर न हों हाँ आग ये बुझाओ कि पंद्रह अगस्त है खाओ क़सम कि ख़ून पिलाएँगे मुल्क को दिल से क़सम ये खाओ कि पंद्रह अगस्त है हर हादसे में अहल-ए-वतन मुस्तइद रहें वो वलवला जगाओ कि पंद्रह अगस्त है ऊँचा रहे शराफ़त-ओ-अख़्लाक़ का अलम परचम बुलंद उठाओ कि पंद्रह अगस्त है हो दर्द-ए-दिल में जज़्बा-ए-हुब्ब-ए-वतन फ़ुज़ूँ 'मफ़्तूँ' क़लम उठाओ कि पंद्रह अगस्त है — Maftun Kotvi
SHER
फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए — Altaf Mashhadi
SHER
ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं
हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं — Mehshar Afridi
SHER
हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही — Sahir Ludhianvi
SHER
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी — Firaq Gorakhpuri
SHER
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा — Allama Iqbal
SHER
हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है — Kanval Ziai
SHER
बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए — Kumar Vishwas
SHER
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो — Jafar Malihabadi
SHER
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं — Rahat Indori
SHER
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी — Lal Chand Falak
GHAZAL
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
Bismil Azimabadi
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तिरे ऊपर निसार ले तिरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है वाए क़िस्मत पाँव की ऐ ज़ोफ़ कुछ चलती नहीं कारवाँ अपना अभी तक पहली ही मंज़िल में है रहरव-ए-राह-ए-मोहब्बत रह न जाना राह में लज़्ज़त-ए-सहरा-नवर्दी दूरी-ए-मंज़िल में है शौक़ से राह-ए-मोहब्बत की मुसीबत झेल ले इक ख़ुशी का राज़ पिन्हाँ जादा-ए-मंज़िल में है आज फिर मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार बार आएँ वो शौक़-ए-शहादत जिन के जिन के दिल में है मरने वालो आओ अब गर्दन कटाओ शौक़ से ये ग़नीमत वक़्त है ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है माने-ए-इज़हार तुम को है हया, हम को अदब कुछ तुम्हारे दिल के अंदर कुछ हमारे दिल में है मय-कदा सुनसान ख़ुम उल्टे पड़े हैं जाम चूर सर-निगूँ बैठा है साक़ी जो तिरी महफ़िल में है वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ हम अभी से क्यूँँ बताएँ क्या हमारे दिल में है अब न अगले वलवले हैं और न वो अरमाँ की भीड़ सिर्फ़ मिट जाने की इक हसरत दिल-ए-'बिस्मिल' में है — Bismil Azimabadi
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