National Doctors' Day Shayari
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National Doctors' Day Shayari

आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें — Ameer Imam
क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए — Nasir Kazmi
इस मरज़ से कोई बचा भी है चारा-गर इश्क़ की दवा भी है — Unknown
कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया — Hafeez Jalandhari
अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो — Shahzad Ahmad
किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे — Shakeel Badayuni
चारासाज़ो मिरा इलाज करो आज कुछ दर्द में कमी सी है — Azhar Nawaz
दाँव पर जान हकीमों की भी लगी है मगर वो शिफ़ा दे रहे हैं सब को अस्पतालों में — Vishwadeep shukla
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे — Shakeel Badayuni
इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते — Ahmad Faraz
ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है — Krishnakant Kabk
गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है होता है पहरों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से — Agha Hashr Kashmiri
वो दिल-नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं मिरा इलाज मिरे चारा-गर के पास नहीं — Nasir Kazmi
किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला — Lutf Ur Rahman
चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना चारा-गर की जान बचाओ पहले तो — Siddharth Saaz

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