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आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग
हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें
Ameer Imam
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक
तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है
Krishnakant Kabk
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इस मरज़ से कोई बचा भी है
चारा-गर इश्क़ की दवा भी है
Unknown
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गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है
होता है पहरों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से
Agha Hashr Kashmiri
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कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया
Hafeez Jalandhari
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
Shahzad Ahmad
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वो दिल-नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं
मिरा इलाज मिरे चारा-गर के पास नहीं
Nasir Kazmi
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
Lutf Ur Rahman
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना
चारा-गर की जान बचाओ पहले तो
Siddharth Saaz
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दाँव पर जान हकीमों की भी लगी है मगर
वो शिफ़ा दे रहे हैं सबको अस्पतालों में
Vishwadeep shukla
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