शाख से टूट कर हरा होनाइस को कहते है बे-वफ़ा होनाअब भी हैरत में डाल देता हैमुस्कुरा कर तेरा जुदा होनाहर ख़सारा मेरे ही हिस्से मेंइतना भी क्या ख़ुदा ख़ुदा होना— Gaurav Saklani