सपने आधे लिक्खे हैं कुछ टूटे वादे लिक्खे हैंहारों का कोलाहल है ख़ामोश इरादे लिक्खे हैंमुमकिन है तुम जानो मेरी और कथा नाकामी कीअब तक क़िस्से ग़ज़लें भी सब आधे अधूरे लिक्खे हैं— Gaurav Kumar Aarambh