बेवजह मुस्कुरा रहे हैं हमज़ख़्म अपने छुपा रहे हैं हमरास्ता भूलना ही बेहतर थातुम से अब दूर जा रहे हैं हमकौन कहता है वो जुदा ही रहेउन के नज़दीक जा रहे हैं हमधूप का नाम ही नहीं है जहाँअपने सपने सुखा रहे हैं हमउस ने पूछा है हाल-ए-दिल साहबदास्ताँ फिर सुना रहे हैं हम— Gora singh