ख़्वाबों में इक हीर बनाए बैठे हैं
हम तेरी तस्वीर बनाए बैठे हैं
थोड़े दिन ही बाक़ी हैं तेरी शादी में
हम ख़ुद की ज़ंजीर बनाए बैठे हैं
ख़ुद ही अपने ऐब सुना कर लोगों को
हम पर्दे को लीर बनाए बैठे हैं
इन आँखों से अब न मिटे यादें तेरी
अश्कों को तहरीर बनाए बैठे हैं
उम्र दराज़ रहे 'गोरे' उन लोगों की
जो ज़हरीले तीर बनाए बैठे हैं
— Gora singh














