मुझे जो रू-ब-रू देखा करेंगे

यक़ीनन इश्क़ से तौबा करेंगे

न जाने पेट की ख़ातिर यूँ कब तक
गला हम ख़्वाब को घोंटा करेंगे

तरफ़दारी अभी जो कर रहे हैं
वही किरदार को मैला करेंगे

किसी दिन हार जाएँगी ये साँसें
हम ऐसे मौत का पीछा करेंगे

मैं सब कुछ छोड़ आया हूँ उन्हीं पर
भरोसा है कि वो अच्छा करेंगे

इन्हें फ़न का कोई मतलब बताए
ये कब तक रील्स पर मुजरा करेंगे

महक कैसे न आएगी ग़ज़ल से
तुम्हें हर हर्फ़ में लिक्खा करेंगे

लबों को चूमने के दौर में हम
तुम्हारे हाथ पर बोसा करेंगे

ज़माने के सभी दर्दों को लिखकर
ग़ज़ल के नाम पर बेचा करेंगे

तुम्हारे बा'द भी ये उम्र सारी
तुम्हारी आस में ज़ाया' करेंगे

— Harsh saxena

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