unhen lagta tha matle men udaasi hai | उन्हें लगता था मतले में उदासी है

  - Harsh saxena

उन्हें लगता था मतले में उदासी है
मगर हर एक मिसरे में उदासी है

तुम्हारे सिर्फ़ लहजे में उदासी है
हमारे ज़र्रे ज़र्रे में उदासी है

उदासी छोड़ दें कैसे ये मुमकिन है
मिली जो हमको विरसे में उदासी है

बड़े दिन बाद उसकी कॉल आई है
यक़ीनन आज ख़तरे में उदासी है

उसे पाया है जिसने घर वो रौशन हो
मेरे तो यार कमरे में उदासी है

हमारे दरमियाँ भी प्यार था लेकिन
बची अब सिर्फ़ रिश्ते में उदासी है

हमीं ने फेंक दी तस्वीर ग़ुस्से में
हमीं कहते हैं बटुए में उदासी है

उदासी से सुख़न में जान पड़ती है
यूँँ ही थोड़ी न मक़्ते में उदासी है

  - Harsh saxena

Mayoosi Shayari

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