उन्हें लगता था मतले में उदासी है
मगर हर एक मिसरे में उदासी है
तुम्हारे सिर्फ़ लहजे में उदासी है
हमारे ज़र्रे ज़र्रे में उदासी है
उदासी छोड़ दें कैसे ये मुमकिन है
मिली जो हमको विरसे में उदासी है
बड़े दिन बाद उसकी कॉल आई है
यक़ीनन आज ख़तरे में उदासी है
उसे पाया है जिसने घर वो रौशन हो
मेरे तो यार कमरे में उदासी है
हमारे दरमियाँ भी प्यार था लेकिन
बची अब सिर्फ़ रिश्ते में उदासी है
हमीं ने फेंक दी तस्वीर ग़ुस्से में
हमीं कहते हैं बटुए में उदासी है
उदासी से सुख़न में जान पड़ती है
यूँँ ही थोड़ी न मक़्ते में उदासी है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Harsh saxena
our suggestion based on Harsh saxena
As you were reading Mayoosi Shayari Shayari