तुम दिन में कभी आए कभी रात में आएआए नहीं मिलने तो ख़यालात में आएमौसम है बहुत ख़ूब मगर जान-ए-तमन्नातुम ज़ुल्फ़ बिखेरो तो ये औक़ात में आए— Hasheem Farooqui