तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थीतुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिलेजब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैंफेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे— Hrishita Singh