Hrishita Singh

Hrishita Singh

@hrishitasingh631

Hrishita Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hrishita Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

9

Content

69

Likes

85

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

रफ़ाक़त है दिल जू न कर जो सब करते हैं तू न कर — Hrishita Singh
अपनी ज़िद में हारे हैं तुम ने अपने सब सेे ज़्यादा प्यारे लोग — Hrishita Singh
जाने यहाँ मिलते हैं कैसे कैसे लोग कुछ अलहदा कुछ हम सेे मिलते जुलते लोग — Hrishita Singh
तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए — Hrishita Singh
सच जान ले न उन का कोई ऐसे सब लोग मुँह छुपाए फिर रहे हैं — Hrishita Singh
हम उस का ग़म छुपाए फिर रहे हैं जिस से ये दिल लगाए फिर रहे हैं — Hrishita Singh
जिसे तुम समझते हो मंज़िल वो बस रास्ता है किसी का — Hrishita Singh
अगर इश्क़ हो मुस्तक़िल हो वो फिर ये इम्कान बेज़ा ख़याली न हो — Hrishita Singh
आधी नींद के मारे लोग कैसे हैं ये बेचारे लोग — Hrishita Singh
वो जितना हसीन मुस्कुराते हैं शायद कोई हादसा छुपाते हैं — Hrishita Singh
अब दिल-लगी हुई है ऐसी सब सेे हर शख़्स आज़माए फिर रहे हैं — Hrishita Singh
वो अर्से के बा'द फिर मिले मुझ को यूँँ सफ़्हे में गुलाब जैसे पाया जाए — Hrishita Singh
ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं — Hrishita Singh
साथ मेरे तो वो चल रहा पर वो मेरा हम सफ़र नहीं — Hrishita Singh

Ghazal

बदनसीबों के भी हिस्से में कभी है आया इश्क़ दूर से लगता रहा दरिया मगर था सहरा इश्क़ इस ज़माने की मुहब्बत में ही उलझा है ये दिल इस ज़माने की तरह ही हो गया है कब का इश्क़ इस को पाने की भी उज़रत अब चुकाई दुनिया ने इस बदन की क़ैद से ही तो रिहा है करता इश्क़ हम तो सजदे में भी बस उस के ही अब तो रहते हैं अब ये भी कैसी क़यामत है या मौला तौबा इश्क़ अब कहाँ कोई दिवाना होता उस के इश्क़ में अब तो यूँँ ही रह गया है जैसे कोई क़िस्सा इश्क़ काम तो ये सब फ़रेबों वाला है जाँ मेरी और तुम तो अच्छे ख़ासे हो फिर तुम नहीं ये करना इश्क़ — Hrishita Singh
होना अब दर - बदर छोड़ देंगे ये गली रहगुज़र छोड़ देंगे काट कर तेरी यादों का जंगल नाम तेरे शजर छोड़ देंगे सजदे में रहना इक शख़्स ख़ातिर इल्तिजा भी असर छोड़ देंगे क़ैद होने के डर से ही अब तो पंछी करना बसर छोड़ देंगे है अगर पाना मंज़िल अकेले फिर अधूरा सफ़र छोड़ देंगे मौत आएगी क्या तुम को भी तब हम भी तुम को अगर छोड़ देंगे उम्र थी इक सभी शिकवों की भी लेना तेरी ख़बर छोड़ देंगे अब मुयस्सर नहीं उन को रोज़ी लड़के भी अपना घर छोड़ देंगे अच्छा है तू नहीं हम को हासिल वरना खोने का डर छोड़ देंगे आख़िरी झूठ है कहते हो, ये कहते हो ये हुनर छोड़ देंगे — Hrishita Singh