चेहरे पर नूर क्यूँ नहीं है
हर लड़की हूर क्यूँ नहीं है
जो भी है फ़ैसला मेरा वो
उस को मंजू़र क्यूँ नहीं है
मैं उस से दूर क्यूँ नहीं हूँ
वो मुझ से दूर क्यूँ नहीं है
लड़की इतनी हसीन है जब
तो फिर मग़रूर क्यूँ नहीं है
गर है अफ़ज़ल को भी मोहब्बत
क़िस्सा मशहूर क्यूँ नहीं है
— S M Afzal Imam















