कुछ तो यार ऐसा काम हो जाए
इस ज़माने में नाम हो जाए
आज फिर बेहिजाब निकलो तुम
आज फिर क़त्ल-ए-आम हो जाए
याद इतना करो कि हिचकी से
उस का जीना हराम हो जाए
— junaid khan
इस ज़माने में नाम हो जाए
आज फिर बेहिजाब निकलो तुम
आज फिर क़त्ल-ए-आम हो जाए
याद इतना करो कि हिचकी से
उस का जीना हराम हो जाए
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