हाल कहना है तुम्हें उस पे भरी महफ़िल मेंहाल ऐसे में हर इक बात बदल कहते हैंलोग ना-अहल यहाँ ख़ूब हैं 'माही' से परउन की सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं— Karal 'Maahi'