कब कहा मैंने कलेजे से लगाओ मुझको
तुम मेरी दोस्त हो तो पास बिठाओ मुझको
मैंने पूछा है तुम्हें सिर्फ़ तुम्हारा ही मिज़ाज
सारी दुनिया की कहानी न सुनाओ मुझको
मैं तो हर शख़्स की ख़ूबी पे नज़र रखता हूँ
तुमने देखे हैं मिरे ऐब गिनाओ मुझको
तुम जो कहते हो हर इक रोज़ नया शे'र सुना
मैं भी कहता हूॅं कभी चाय पिलाओ मुझको
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