कब कहा मैं ने कलेजे से लगाओ मुझ को
तुम मेरी दोस्त हो तो पास बिठाओ मुझ को
मैं ने पूछा है तुम्हें सिर्फ़ तुम्हारा ही मिज़ाज
सारी दुनिया की कहानी न सुनाओ मुझ को
मैं तो हर शख़्स की ख़ूबी पे नज़र रखता हूँ
तुम ने देखे हैं मिरे ऐब गिनाओ मुझ को
तुम जो कहते हो हर इक रोज़ नया शे'र सुना
मैं भी कहता हूँ कभी चाय पिलाओ मुझ को
— Daagh Aligarhi















