अपनी बाँहों में ऐसे सुलाए हुएसारे नग़्मा मोहब्बत के गाने लगेअब जो 'महमूद' ख़त लिख के छोड़े हो जोख़ुद ही पढ़ के वो मुझ को सुनाने लगे— Mahmood munja