tahayyur ho gaya hooñ main rihaai se | तहय्युर हो गया हूँ मैं रिहाई से

  - Harsh Kumar Bhatnagar

तहय्युर हो गया हूँ मैं रिहाई से
मगर ख़ुश लग रहा है वो जुदाई से

मोहब्बत में भले सब कुछ लुटा देना
मगर तू दूर रहना बे-वफ़ाई से

तू अपनी माँ को ही ख़ुश रख नहीं सकता
तो क्या ही सीखा है तूने पढ़ाई से

ज़माना इसलिए भी छोड़ा था मैंने
परेशाँ हो चुका था ख़ुद-सताई से

अना ने इस क़दर अंधा किया मुझको
जलन होने लगी अपने ही भाई से

ख़फ़ा रहने का आदी हो गया हूँ मैं
हँसाना पड़ता है अब गुदगुदाई से

ख़ुदा के पास तू अब बैठा दे मुझको
बदन थकने लगा है चारपाई से

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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