सभी के दिल में बसी शा'इरी की दुनिया है
मगर ये अस्ल में तो बे-कली की दुनिया है
नजात कैसे मिलेगी तुम्हें ज़माने से
तुम्हारे दिल में छिपी बे-कसी की दुनिया है
भरोसा नाम का ही रह गया है हाथों में
ये दोस्ती की नहीं दुश्मनी की दुनिया है
किसी ने पाँव के नीचे रखा है दुनिया को
किसी के हाथ बची दो घड़ी की दुनिया है
— Harsh Kumar Bhatnagar















