qalb bhi gham se bhar gaya kab ka | क़ल्ब भी ग़म से भर गया कब का

  - Manohar Shimpi

क़ल्ब भी ग़म से भर गया कब का
टूट के फिर बिखर गया कब का

हादिसे के लिए करें क्या ही
रोष था जो उतर गया कब का

यूँँ बिछड़कर कहाँ मिले साहिल
ख़ास लम्हा गुज़र गया कब का

अब चलो बात और करते हैं
देखो तूफाँ ठहर गया कब का

दोस्त कहते उसे हुआ क्या है
था वो बिगड़ा सुधर गया कब का

ज़िक्र जिसका सभी करे हैं वो
क़ैदस कैसे घर गया कब का

गुम-शुदा शख़्स जो 'मनोहर' था
शोर-ग़ुल में वो मर गया कब का

  - Manohar Shimpi

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