अगर ये दरिया समुंदर में मिल गया सोचो
ग़ुरूर आने लगा मीठा दिल गया सोचो
गले लगाते ही पागल ख़ुशी से हो जाता
महज़ हँसी से ही मेरे जो खिल गया सोचो
अगर मैं चींखता तो वो वहीं पे मर जाता
जो आज मेरी इन अश्कों से हिल गया सोचो
ये दुनिया मुफ़्त में देगी बिला-ज़रूरत भी
पुराना ज़ख़्म जो सीने का सिल गया सोचो
— maqbul alam















