maqbul alam

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@maqbulal191185

maqbul alam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in maqbul alam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

Ghazal

तोहमतों से, ज़ुल्म से, ना तुम रुला कर छोड़ना मुझ को गर हो छोड़ना, बस मुस्कुरा कर छोड़ना एक पल ना दूर होंगे तेरी नज़रों से हम कभी याद आता है तेरा वा'दा निभा कर छोड़ना हो जाएगा ईद जैसा अपने कूचे का माहौल छत पे आके इक दफा पर्दा उठा कर छोड़ना तुम सेे जन्नत मुँह न फेरे, कर लो हक में अपने अभी रूठी मां को तुम सभी अपने मना कर छोड़ना बिछड़े मुद्दत हो गया पर,आदत न बदली मेरी कभी उँगलियों से रेत पर चेहरा बना कर छोड़ना गर संभलने लग जाऊँ तो, ऐसे करना काबू मुझे इक दफा तुम याद उस की मुझ को दिला कर छोड़ना ढूंढ ना ले मुझ को दुनिया तेरे पहलू में कहीं अपनी ज़ुल्फों के तले मुझ को छुपाकर छोड़ना जान लेगी मेरी इक दिन उस सेे कह दो ये छोड़ दे सुर्ख़ लब के दरमियाँ उँगली दबा कर छोड़ना देखो "आलम" है अभी तक तस्वीर मेरी मेज़ पर उस की आदत बदली नहीं दिल से लगाकर छोड़ना — maqbul alam
अब जनाज़े पे मेरे तुम को ना आना होगा आखरी वा'दा बिछड़ने का निभाना होगा इक वही शख़्स ज़रूरी है जीने का मगर है भुलाना भी ज़रूरी तो भुलाना होगा ऐब को अपने छुपाकर जो बहुत तनते है आईना उन के ज़मीरों को दिखाना होगा जानता हूँ के ग़ज़ल ज़ख़्मों को कर देंगे हरा उन की ख़ुशियों के लिए फिर भी सुनाना होगा अब टपकता है मेरे कपड़ों पे वफाओं का लहू आलमारी से तेरे ख़त को हटाना होगा अब कहीं ग़लती से तेरा नाम न लब पे आए इक ज़रा होंटों पे पैबंद लगाना होगा दिल के हालात समझता है मेरे दर्दों का अश्क आँखों से मगर फिर भी बहाना होगा आप के हाल पे "आलम" ये बहुत रोते है अब मुंडेरों से कबूतर को उड़ाना होगा — maqbul alam
वो शख़्स मेरे दिल से कब का चला गया जैसे के जिस्म से ये साया चला गया पत्तों की सरसराहट से ऐसा लगा मुझे वो आया मेरे पास में बैठा चला गया दरिया की मछलियां भी मुझे चाहने लगी इक मर्तबा वो साथ मेरे क्या चला गया अब पास से भी वो नज़र आता नहीं मुझे वो दूर नज़रों से कुछ ऐसा चला गया हँस हँस के जिस पे वार दी ख़ुशियाँ जहान की फिर उस के बा'द ख़ुद पे मैं हँसता चला गया ये सोचा हाथ उस का मैं थाम लूँ मगर कमबख्त मेरे हाथ से मौका चला गया वो कर रहा था हँस के वाद ए वफ़ा की बात हर शख़्स महफिलों से उठता चला गया माँ ने दुआएँ देकर "आलम" किया विदा हर मुश्किलों से ख़ूब मैं बचता चला गया — maqbul alam

Nazm

एहसास ए मुहब्बत दिलों की धड़कन ये कह रही है, के तुम ही बसते हो धड़कनों में, छलक छलक के निकल रहा है, के तेरा चेहरा इन आसुओं में !! हमें तो कोई ख़बर नहीं है, के दिल कहीं और जाँ कहीं है, के पहले थी बे-क़रार राहत, मज़ा है अब इन उलझनों में !! के फिरता हूँ तेरे चार-सू मैं, मिले जो मौका तो चूम लूँ मैं, बदन तुम्हारा है फूल जैसा, के झगड़े होते हैं तितलियों में !! के ऐसे ना छोड़ो डालकर तुम, दुपट्टा रखो सँभाल कर तुम, ये काँटे सारे लगे महकने, के रंग बरपा है ख़ुशबुओं में !! न जाने काँटों को क्या हुआ है, के फूल बनकर मुझे छुआ है, के मां ने जब से दुआ किया है, तनाव ज़ारी है मुश्किलों में !! बहुत बचाया है लाख तुम सेे, मगर ये "आलम" ना सोच पाए, ख़ुदारा कैसे ना क़त्ल होंगे, के जान अटकी है बालियों में !! — maqbul alam