maqbul alam

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@maqbulal191185

maqbul alam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in maqbul alam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मुसव्विरों ने हमें क्या दिया मुहब्बत से
ग़मों को मेरा ही चेहरा दिया मुहब्बत से

किसी के प्यार को ठुकरा दिया था मैनें भी
किसी ने मुझको भी ठुकरा दिया मुहब्बत से
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maqbul alam
फ़लक के चाँद, सूरज और अंजुम से नहीं मिलते
चमकते है मगर तेरे तबस्सुम से नहीं मिलते

तुम्हारे चेहरे से ही हु-ब-हू ये मेल खाते है
मेरी ग़ज़लें जो मेरे ही तरन्नुम से नहीं मिलते
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maqbul alam
राधे-राधे मन ये बोले मोहन तुम समझाओ ना
तन्हा-तन्हा बैठे है हम बंसी ज़रा बजाओ ना

गोपी सारी रूठ गई है दरिया सूना-सूना है
दरिया से तुम मेल रचाकर गगरी को चटकाओ ना
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maqbul alam
तेरी तस्वीर ना हो सीने में
क्या मज़ा ख़ाक ऐसे जीने में

जाम हाथों में सामने तू है
ऐसी मुश्किल हुई है पीने में
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maqbul alam
तुम कर बैठे थे न जाने कितने वादे लफ़्ज़ों में
हमने तुमसे प्यार किया था सीधे-साधे लफ़्ज़ों में

मैंने चाहा था लिखूँ मैं कुदरत की रंगीनी को
बस तेरा ही नाम यहाँ पर आते-जाते लफ़्ज़ों में
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maqbul alam
ज़माने भर के सब तैराक डूबे है किनारों पर
ये दरिया ए मुहब्बत है लिया है जां इशारों पर

तुम्हारे इश्क में इस दर्ज़ा मैं पागल हुआ हूं की
तुम्हारा नाम लिख डाला है घर के हर दीवारों पर
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maqbul alam
अगर ये दरिया समंदर में मिल गया सोचो
गुरुर आने लगा मीठा दिल गया सोचो

गले लगाते ही पागल खुशी से हो जाता
महज़ हँसी से ही मेरे जो खिल गया सोचो

अगर मैं चींखता तो वो वहीं पे मर जाता
जो आज मेरी इन अश्कों से हिल गया सोचो

ये दुनिया मुफ़्त में देगी बिला-ज़रूरत भी
पुराना ज़ख़्म जो सीने का सिल गया सोचो
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maqbul alam
लोग बैठे है जो सभी तन्हा
उनको ना छोड़ना कभी तन्हा

ये जो महफिल लगी है रोने पर
हँस के हो जाऊंगा अभी तन्हा
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maqbul alam
ज़ख्मों पे मेरे लम्स के मरहम निकाल दे
वरना तू जिस्म से मेरी ये दम निकाल दे

मेरे ख़ुदा की रहमतें बच्चे में देखिए
वो चाह ले तो एड़ी से ज़मज़म निकाल दे
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