
ज़माने भर के सब तैराक डूबे है किनारों पर
ये दरिया ए मुहब्बत है लिया है जाँ इशारों पर
तुम्हारे इश्क़ में इस दर्ज़ा मैं पागल हुआ हूँ की
तुम्हारा नाम लिख डाला है घर के हर दीवारों पर
— maqbul alam
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