बिछड़ कर मिरी ज़िंदगी से गया
जिसे जाना था वो ख़ुशी से गया
निगाहें हैं अटकी घड़ी पर मेरी
मुझे छोड़कर जिस घड़ी से गया
ये कहते हुए रोने माँ लग गई
मेरा बेटा मर आशिक़ी से गया
— Harsh Kumar
जिसे जाना था वो ख़ुशी से गया
निगाहें हैं अटकी घड़ी पर मेरी
मुझे छोड़कर जिस घड़ी से गया
ये कहते हुए रोने माँ लग गई
मेरा बेटा मर आशिक़ी से गया
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