मिरी इक बात कह देना ज़रा उस को
नहीं आती है करनी अब वफ़ा उस को
हुई हो जिस को बीमारी मुहब्बत की
कहाँ लगती है कोई भी दवा उस को
नहीं मालूम जिस को राम का मतलब
सुनाते जा रहे हो तुम कथा उस को
वो जिस से भी मुहब्बत करती है यारों
समझने लगती है फिर वो गधा उस को
— Harsh Kumar















