उस की आँख में देख रहे हो बस धोका ही धोका है
पार करे कोई सहरा तब इक दरिया भी पड़ता है
मेरा कोई दीन नहीं था लेकिन अब तो दुनिया भी
मेरे शाइ'र हो जाने में हाथ तुम्हारा लगता है
सब से कहता रहता था वो तुम बस अपना ध्यान रखो
कहता है अब मर जाऊँगा क्या ऐसा भी होता है
दुनिया कितनी भोली-भाली कान की कच्ची लड़की है
अपने घर की दीवारों को हाल सुनाना पड़ता है
— Muntazir Firozabadi















