उन इश्क़ के भी हारों को हारा नहीं मिला
हम जैसे आशिक़ों को किनारा नहीं मिला
यूँ प्यार की तो उम्र भर उम्मीद थी हमें
फिर भी किसी से इश्क़ दोबारा नहीं मिला
जब वक़्त यूँ ही बीता तो इंसाॅं बदल गए
उन जैसे जाहिलों को ख़सारा नहीं मिला
221 2121 1221 212
— Naviii dar b dar















