तू सब कुछ जानने वाला अकेला
बता, फिर क्यूँ हूँ मैं इतना अकेला
तेरी चाहत में तेरे ग़म भी चाहे
कभी तुझ को नहीं चाहा अकेला
मैं महफ़िल में हँसाने वाला सब को
पसे-पर्दा बहुत रोया अकेला
बदन हूँ मैं अगर तो वो भी होगा
कभी होता नहीं साया अकेला
हटा दी यार की तस्वीर मैं ने
तड़पकर रो पड़ा कमरा अकेला
वो अपने साथ मुझ को ले गया है
मैं जिस को छोड़ कर लौटा अकेला
तमाशा बन गई है सारी दुनिया
बचा मैं देखने वाला अकेला
— Nitesh Kushwah















