हम निकलने के तरीक़े जानते हैं
क़ैद-ख़ाने पर कहाँ ये जानते हैं
उन परिंदों ने भरोसा कर लिया पर
हम इन इंसानो के झाँसे जानते हैं
तुम ने जो सब कुछ किताबों में पढ़ा है
हम वो सब कुछ तजरबे से जानते हैं
क्यूँ भटकते फिर रहे हैं इस तरह हम
सच बताना आप रस्ते जानते हैं
इस लिए बाज़ार में मन मार आए
क्यूँकि घर का हाल बच्चे जानते हैं
तुम से अब ग़ज़लों में ही मिलना पड़ेगा
प्यार के दुश्मन ठिकाने जानते हैं
क्यूँ न रखवाली करें तालाब की हम
जब मछेरे के इरादे जानते हैं
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















