hausla jiska mar nahin saktaa | हौसला जिसका मर नहीं सकता 

  - SALIM RAZA REWA

हौसला जिसका मर नहीं सकता 
मुश्किलों से वो डर नहीं सकता

लोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा है 
मुद्दतों तक ये भर नहीं सकता

उनकी आदत है यूँँ डराने की 
मेरी फ़ितरत है डर नहीं सकता 

जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे 
बद-दुआओं से मर नहीं सकता

 
लाख फ़ितरत की ज़ुल्फ़ सुलझाओ

बिगड़ा ख़ाका सुधर नहीं सकता

  - SALIM RAZA REWA

More by SALIM RAZA REWA

As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA

Similar Writers

our suggestion based on SALIM RAZA REWA

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari