mushkilein bharmaar hoti ja rahi hain aaj kal | मुश्किलें भरमार होती जा रही हैं आज कल

  - SALIM RAZA REWA

मुश्किलें भरमार होती जा रही हैं आज कल
कोशिशे बेकार होती जा रही हैं आज कल

 
वो अदा-ए-दिल नशीं क़ातिल नज़र हुस्न ओ हुनर

क़ाबिल-ए-इज़हार होती जा रही हैं आज कल
 

चाहिए इनको हमेशा इक दवाई की ख़ुराक
ख़्वाहिशें बीमार होती जा रही हैं आज कल

 
दौलत-ओ-शोहरत की लालच बढ़ गई हैं इस क़दर

ज़िंदगी आज़ार होती जा रही हैं आज कल
 

ऐ रज़ा कुछ लड़कियाँ जो घर की ज़ीनत थीं कभी
रौनक़-ए-बाज़ार होती जा रही हैं आज कल

  - SALIM RAZA REWA

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