raushan hai uske dam se sitaaron kii raushni | रौशन है उसके दम से सितारों की रौशनी 

  - SALIM RAZA REWA

रौशन है उसके दम से सितारों की रौशनी 
ख़ुशबू लुटा रही है बहारों की रौशनी

इक वो है माहताब फ़क़त आसमान में 
फीकी है जिसके आगे हज़ारों की रौशनी

तुम क्या गए कि चाँदनी बे-लुत्फ़ हो गई 
चुभती है क़ल्ब-ओ-जाँ में सितारों की रौशनी

 
क्या जाने किस ग़रीब पे ढाएगी ये सितम 

पागल सी  हो गई है शरारों की रौशनी
उस घर से दूर रहती हैं हर दम मुसीबतें 

जिस घर में झिलमिलाती हो पारों की रौशनी

  - SALIM RAZA REWA

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