मत इश्क़ ख़सारे में, जागीर लिए आनाशब-रोज़ न ख़्वाबों की, ता'बीर लिए आनानादान नहीं बनना, उस को न सताना तुमजब वक़्त कभी भी हो, तक़रीर लिए आनाबे-रंग भरी दुनिया, अब रास न आए हैसब-रंग भरूँगा मैं, तस्वीर लिए आनासरगोश' बताते हैं, महबूब-दिवाने अबयूँ बात न मानेंगे, ज़ंजीर लिए आना— Lokesh Vashishtha