
कब किस को मिलता है प्यार यहाँ शहरे-दिल्ली में
ग़ालिब-मोमिन सब हैं यार यहाँ शहरे-दिल्ली में
ख़ुद को सब से दूर किया ख़ुद के क़रीब आ बैठे हैं
सब हैं मेरे शुक्र-गुज़ार यहाँ शहरे-दिल्ली में
— Lokesh Vashishtha
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