ख़ुशी से जब कभी धड़कन ज़रा सी मुस्कुराती है
उदासी आ मिरे दिल के बग़ल में बैठ जाती है
कि नफ़रत के ये हल्के झोंके जिन को तोड़ देते हैं
मुहब्बत क्यूँ भला तू इतने कच्चे घर बनाती है
कभी जो बैठ के गाने लगूँ मैं ख़ामुशी का गीत
तो कोयल भी आ मेरे पास सुर में सुर मिलाती है
वो जिस को पा नहीं सकते हैं हम इस जन्म में शायद
मुझे क्यूँ नींद तू उस शख़्स के सपने दिखाती है
तुम्हारी याद आने पर तुम्हारा नाम लिखता हूँ
तुम्हारा नाम लिखने पर तुम्हारी याद आती है
— Sarvjeet Singh















