इस दिल का आलम लिखता हूँ
पर अब काफ़ी कम लिखता हूँ
लिखने को है कितना कुछ पर
क्यूँ फिर बस मैं ग़म लिखता हूँ
तेरे हँसते लब लिखने को
अपनी आँखें नम लिखता हूँ
जब छा जाती है तन्हाई
बीयर व्हिस्की रम लिखता हूँ
ख़्वाबों की बस्ती है जिस में
मैं और तुम को हम लिखता हूँ
— Sarvjeet Singh















