वो बहुत ही हसीन है तो क्या
दिल पे मेरे मकीन है तो क्या
ज़िंदगी ऐश से जिएँगे हम
आख़िरी मौत सीन है तो क्या
ख़ूब-सूरत बदन नहीं उस का
वो बहुत ही ज़हीन है तो क्या
कौन बोला है बोलने को सच
झूठ पे जब यक़ीन है तो क्या
इश्क़ तो चाहता बदन है बस
जब बदन अंगबीन है तो क्या
— Sayeed Khan















