अपने चेहरे से उकता गए हैं
इस दिखावे से उकता गए हैं
दिल हमारा अगर है खिलौना
इस खिलौने से उकता गए हैं
पूछ लेना पहाड़ों का जीवन
जो ज़माने से उकता गए हैं
इश्क़ है बोरियत का फ़साना
और वो पहले से उकता गए हैं
दोस्ती दिल-लगी या भरोसा
इस हवाले से उकता गए हैं
एक दिन ख़ुद कहोगी 'शगफ़' को
इस दिवाने से उकता गए हैं
— Adnan Ali SHAGAF















