gar safar tere saath ho jaa.e | गर सफ़र तेरे साथ हो जाए

  - Adnan Ali SHAGAF

गर सफ़र तेरे साथ हो जाए
कितनी लज़्ज़त की बात हो जाए

गश्त का लुत्फ़ भी अलग हो जब
तेरे हाथों में हाथ हो जाए

तेरे हर ग़म को जज़्ब कर लूँ, गर
तेरी उँगली पे हाथ हो जाए

बात कुछ भी नहीं बस इतनी है
उन सेे थोड़ी सी बात हो जाए

तेरा चेहरा जो इतना दिलकश है
इतनी दिलकश ये रात हो जाए

इस तरह तुमको अपने पास रखूँ
एक तस्वीर साथ हो जाए

"उसका कहना, शगफ़ हो तुम मेरे बस"
कहते कहते ही रात हो जाए

  - Adnan Ali SHAGAF

Aaina Shayari

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