main agar sach tumhein bataaunga | मैं अगर सच तुम्हें बताऊँगा

  - Adnan Ali SHAGAF

मैं अगर सच तुम्हें बताऊँगा
फिर तो मैं आइना हो जाऊँगा

उस
में खिड़की नहीं रखूँगा कोई
मैं नया घर अगर बनाऊँगा

जुगनुओं को करूँँगा मैं शादाब
बाग़ में तितलियाँ जलाऊँगा

वस्ल के दिन मैं क्या करूँँगा भला
तुमको देखूँगा मुस्कुराऊँगा

सब तेरा जिस्म खा रहे होंगे
मैं यहाँ उँगलियाँ चबाऊँगा

रूह तो ख़ैर मेरी मंज़िल है
पर बदन रास्ता बनाऊँगा

रक़्स करती हैं कुछ मधुर यादें
जो तेरे साथ गुनगुनाऊँगा

क़ैद ख़ाने में कुछ नहीं तो फिर
बेड़ियों को ही काट खाऊँगा

  - Adnan Ali SHAGAF

Jashn Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Adnan Ali SHAGAF

As you were reading Shayari by Adnan Ali SHAGAF

Similar Writers

our suggestion based on Adnan Ali SHAGAF

Similar Moods

As you were reading Jashn Shayari Shayari