aanevaale ki mukhbari kar de | आनेवाले की मुख़बरी कर दे

  - Adnan Ali SHAGAF

आनेवाले की मुख़बरी कर दे
कोई अच्छी सी आगही कर दे

ख़ुद को इक गहरा फ़लसफ़ी कर दे
यानी तू अक़्ल की दही कर दे

गर मुहब्बत नहीं तो जान-ए-अदा
मेरे हिस्से में दोस्ती कर दे

वो मेरे सब्र का समर है ख़ुदा
सो मुझे एक तश्तरी कर दे

हर घड़ी उसका आना जाना हो
मुझको महबूब की गली कर दे

कभी गुज़रे न 'इश्क़ का मौसम
हर महीने को फ़रवरी कर दे

अपनी धड़कन की धुन सुना के "शगफ़"
मेरे जीवन को शायरी कर दे

  - Adnan Ali SHAGAF

Bekhudi Shayari

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