दिल तोड़ना तो सरकशी होती नहीं
और इस ख़ता पर जेल भी होती नहीं
हर झोपड़ी में खोपड़ी है लाज़िमन
हर खोपड़ी पर झोपड़ी होती नहीं
तुम को भले जो भी समझ आए मगर
इन लड़कियों में नाज़ुकी होती नहीं
इल्म-ओ-अदब शेर-ओ-सुख़न में चूर हूँ
सो मुझ से अब ये नौकरी होती नहीं
है चाहतों ने इस क़दर तोड़ा शगफ़
अब चाहतों पर शा'इरी होती नहीं
— Adnan Ali SHAGAF















