अनकही आगही से ख़तरा हैसो मुझे शा'इरी से ख़तरा हैजो सभी का जला रही है दिलगाँव की फुलझड़ी से ख़तरा हैनहर पर क्या किसी का ध्यान नहींइस की आलूदगी से ख़तरा हैकाफ़ी पुर-अम्न है अज़ीमाबादबस ग़लत संगती से ख़तरा हैमान्यताएँ हैं अपनी अपनी मगरकुछ तो जादूगरी से ख़तरा हैदिल है आवारगी पसंद "शगफ़"माँ को आवारगी से ख़तरा है— Adnan Ali SHAGAF