mumkin hai is zindaan se main ab rihaa ho jaaunga | मुमकिन है इस ज़िन्दान से मैं अब रिहा हो जाऊँगा

  - Adnan Ali SHAGAF

मुमकिन है इस ज़िन्दान से मैं अब रिहा हो जाऊँगा
मुमकिन है औरों की तरह मैं भी फ़ना हो जाऊँगा

मुमकिन है अब तुमको मेरा दीदार भी हासिल न हो
मुमकिन है मैं अब जाने जाँ तुम सेे जुदा हो जाऊँगा

मुमकिन अगर हो तो मुझे तू आज जी भर देख ले
मुमकिन है तेरे बाद कोई और का हो जाऊँगा

मुमकिन है मैं इक शख़्स की नाराज़गी सर पर लिए
मुमकिन है मैं हर शख़्स से बेहद ख़फ़ा हो जाऊँगा

मुमकिन अगर है तो मुझे अपनी दुआ में याद कर
मुमकिन नहीं ये भी तो मैं फिर बद्दुआ हो जाऊँगा

मुमकिन है तेरे 'इश्क़ की ये जी हज़ूरी छोड़कर
मुमकिन यही है अब ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हो जाऊँगा

मुमकिन है अपनी फ़ारिहा को ढूँढते फिरते शगफ़
मुमकिन किसी दिन हज़रते जौन एलिया हो जाऊँगा

  - Adnan Ali SHAGAF

I Miss you Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Adnan Ali SHAGAF

As you were reading Shayari by Adnan Ali SHAGAF

Similar Writers

our suggestion based on Adnan Ali SHAGAF

Similar Moods

As you were reading I Miss you Shayari Shayari